सासनी। जब-जब धरती पर अधर्म का बोलबाला होता है, तब-तब भगवान का किसी न किसी रूप में अवतार होता है। जिससे असुरों का नाश होता है और अधर्म पर धर्म की विजय। भगवान चारों दिशाओं के कण-कण में विद्यमान है। इन्हें प्राप्त करने का मार्ग मात्र सच्चे मन की भक्ति ही है। त्रेता युग में जब असुरों की शक्ति बढ़ने लगी तो माता कौशल्या की कोख से भगवान राम का जन्म हुआ।। उक्त व्याख्यान मानस मर्मज्ञ आचार्य अतुल कृष्ण भारद्वाज ने श्रीराम कथा में श्री रामचन्द्र जी भगवान के जन्म के समय दिया ।उन्होंने कहा कि भगवान सर्वत्र है। प्रेम से पुकारने व सच्चे मन से सुमिरन करने पर कहीं भी प्रकट हो सकते हैं। इसलिए कहा गया है हरि व्यापक सर्वत्र समाना। आगे व्यास जी ने कहा निरगुण से सगुण भगवान सदैव भक्त के प्रेम के वशीभूत रहते हैं और भक्तों के भाव पर समुण रूप लेते हैं।धर्म व सम्प्रदाय में अन्तर को समझाते हुए श्री भारद्वाज ने बताया कि धर्म व्यक्ति के अन्दर एकजुटता का भाव पैदा करता है, वहीं सम्प्रदाय व्यक्ति को बाहरी रूप से एक बनाता है। मानव को एकजुटता की व्याख्या करते हुए श्री व्यास जी ने कहा है कि एक पुस्तक एक पूजा स्थल एक पैगम्बर एक पूजा प्रद्धति ही, व्यक्ति को सीमित व संकुचित बनाती है, जबकि ईश्वर के विभिन्न रूपों को विभिन्न माध्यमों से स्मरण करना मात्र सनातन धर्म ही सिखाता है।। ईश्वर व पैगम्बर में अन्तर को बताते हुए उन्होंने कहा कि ईश्वर के अवतार से असुरों का नाश होता है। अधर्म पर धर्म की विजय होती है। यह अद्भुत कार्य मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम एवं भगवान श्री कृष्ण ने अयोध्या व मथुरा की घरती पर अवतार लेकर दिखाया। दोनों ने असुरों का संहार करके धर्म की रक्षा की। श्री व्यास जी ने देश की युवा पीढी पर घोर चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि आज का युवा पाश्चात्य सभ्यता के भंवर में फंसा हुआ है। उसे राम, कृष्ण, सीता के साथ भारतीय सभ्यता से मतलब नहीं है। उन्होंने माताओं से आग्रह कि यदि माताएं चाहें तो युवा पाश्चात्य सभ्यता से अलग हो सकता है। सभी माताओं से आग्रह किया कि गर्भवती माताओं के चिन्तन, मनन, खान-पान पठन-पाठन, रहन- सहन का बच्चे पर अत्यन्त प्रभाव पङता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान माताओं को भगवान का सुमिरन करना चाहिए। साथ ही साथ सात्विक भोजन व चिन्तन आदि करना चाहिए।
भगवान राम के जन्म की व्याख्या करते हुए बताया कि भगवान के जन्म के पूर्व भगवान विष्णु के द्वारपाल जय-विजय को राक्षस बनने का श्राप, मनु और सतरूपा के तप से भगवान ने राजा दशरथ व माता कौशल्या के घर जन्म लिया, जिससे समस्त अयोध्यावासी प्रसन्न हो उठे। भगवान राम के जन्म की व्याख्या के दौरान जैसे ही कथा व्यास ने भजन गाया,वैसे ही श्रोता झूम उठे। मानो सचमुच पंडाल में भगवान का जन्म हुआ हो। पूरा पाण्डाल राममय हो गया। पूरे पाण्डाल में पुष्पों की वर्षा हुई।। इस अवसर पर कथा के मुख्य यजमान एंव जिलाध्यक्ष राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा पार्टी विजय कुमार शर्मा,जिला महासचिव/प्रभारी निशांत उपाध्याय,भाजपा के पूर्व विस्तारक संजीव गोयल,आचार्य पं. खगेन्द्र शास्त्री,संजय उपाध्याय, संतोष वार्ष्णेय,अरविन्द वार्ष्णेय, सत्यप्रकाश, कालू पंडित, मदन मोहन अग्रवाल,डॉ. कैलाश शर्मा,नरेश कुशवाहा, अखिल अग्रवाल, संजय सिंह,मनोज अग्रवाल, वसन्तलाल वार्ष्णेय आदि रामभक्त मौजूद थे।









