हाथरस। उपाध्याय श्री 108 शिवदत्त जी महाराज एवं मुनि श्री 108 पदमदत्त जी महाराज ने प्रवचनों में कहा कि लोग रात दिन धन कमा रहे हैं, धन कमाते जा रहे हैं और धन-धन कर रहे हैं, वह धन- धन करते-करते धर्म भूल गए हैं और एक दिन धन-धन करते निधन हो जाएगा। यह हाल तब है जब सभी जानते हैं कि हम इस धन को ऊपर नहीं ले जा सकते हैं, फिर भी लोग 24 घंटे धन कमाने में लगे हुए, दिन रात लगे हुए , यदि रात ना हो तो आदमी रात को सोए भी नहीं।। मुनि श्री ने कहा कि धन कमाना बुरा नहीं है किंतु उसका सदुपयोग कर अपनी धनराशि को एक्सचेंज करना है तो धार्मिक कार्य करने होंगे, तभी आप अपने धन को एक्सचेंज कर सकते हैं। मुनि श्री शिवदत्त सागर जी हलवाई खाना स्थित श्री पारसनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़े मंदिर में प्रवचन कर रहे थे। शिवदत्त जी महाराज की आहारचर्या मुरसान गेट स्थित मनीष जैन रंग के हुई। जब मुनि महाराज हलवाई खाने से मुरसान गेट के लिये मंदिर से अंजलि लेकर निकले तो जयकारो के साथ जगह जगह सभासद धीरज जैन व बीना जैन के नेतृत्व में पुष्प वर्षा की गई ।

मुनि शिवदत्त जी महाराज ने कहा कि प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ ने आप सभी को परिवार के लालन-पालन करने की प्रेरणा दी थी, लेकिन यह भी कहा था कि परिवार के साथ-साथ आपको धर्म को नहीं भूलना है। लेकिन मनुष्य परिवार का लालन पालन करने के साथ-साथ धन कमाने में लग गया और धर्म पीछे छूट गया। भगवान आदिनाथ ने यह भी कहा था कि आप जो भी कमाई करो उसमें से 25 प्रतिशत की धनराशि दान के रूप में निकाल कर उस धनराशि से मंदिर निर्माण, मुनियों के आहार बिहार ,तीर्थ वंदना पर खर्च कर इस धन को ऊपर जाकर एक्सचेंज कर सकते हैं। लेकिन लोग पैसा कमाने में दिन रात लगे हुये है और धर्म को भूल गये। वह तो अच्छा कि धन ले जाने की ऊपर कोई व्यवस्था नही है। धन -धन करते एक निधन हो जाता है। गलत कामो से कमाया गया धन कभी आपके पास नही रहता है, ऐसा धन बीमारी आदि में खर्च हो जाता है। आप सही ढ़ग और ईमानदारी से कमाई गयी अपनी धनराशि का सदुपयोग कर एक्सचेंज करा सकते हैं।
जब आप अपनी धनराशि मंदिर के निर्माण, मुनियों की सेवा में खर्च करेंगे तो निश्चित रूप से आपके द्वारा कमाया गया धन ऊपर जाकर एक्सचेंज करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य को 24 घंटे में कम से कम 4 घंटे भगवान की सेवा में देना चाहिए। प्रातः 4 बजे उठने वाले लोग देवता समान, 5 बजे उठने वाले मनुष्य, 6 बजे उठने वाले जानवर और 7 से 8 उठने वाला व्यक्ति राक्षस है। अब आप बताओ कि आप किस कैटेगरी में आते हो। यदि आपको अपना कल्याण करना है तो अपनी दिनचर्या में बदलाव लाना होगा। लोग देर रात तक जागते हैं तो फिर सुबह कैसे जल्दी उठ सकते हैं। देर से उठने वाले मंदिर भी 12 बजे तक जाते हैं। उन्होंने कहा कि गाय को पहली रोटी और कुत्ता को आखिरी दी जाती है। गाय में करुणा और प्रेम का भाव है, गाय को माता के रूप में देखा जाता है, जो आगे की रोटी खाता है वह आगे बढ़कर कार्य करता है। अंत में मुनि श्री ने कहा कि दर्पण में मुख और संसार में सुख क्षणिक होता है, अतः सभी को समय का पालन करना चाहिए।
इस मौके पर श्री जैन नवयुवक सभा अध्यक्ष उमाशंकर जैन, राकेश जैन, बाल पंडित विशाल जैन, अमित जैन, संजीव जैन भूरा, धीरज जैन सभासद, राजेश जैन बैंक, जितेंद्र जैन रेडीमेड, अतुल जैन वसुंधरा, संजीव जैन लुहाड़िया, राजकुमार जैन लोहिया, मनीष जैन, राजू जैन, विजय जैन भूच, आशीष जैन, हरविन्द जैन, अनिल जैन, पवन जैन, नितिन जैन, सौरभ जैन अजमेरा आदि मौजूद थे।









