हाथरस। देश में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को सुदृढ़ करने, हर जिले व तहसील में इलेक्ट्रिक सिटी बसों के संचालन तथा इथेनॉल मिश्रित ईंधन से वाहन स्वामियों को हो रही समस्याओं के निवारण के संबंध में।प्रधानमंत्री, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री, केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री (इलेक्ट्रिक वाहन एवं फेम योजना प्रभारी),मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार,प्रबंध निदेशक उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम आदि को जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन भेज कर उनके निवारण की मांग की गई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि मानव कल्याण सामाजिक संस्था जनहित में पर्यावरण संरक्षण और नागरिकों के अधिकारों के लिए निरंतर संघर्षरत है। वर्तमान समय में देश में बढ़ती गाड़ियों की संख्या के कारण ट्रैफिक जाम, जानलेवा वायु प्रदूषण और आम जनता की जेब पर बढ़ता आर्थिक बोझ एक विकट समस्या बन चुका है। इन सभी समस्याओं का एकमात्र स्थाई समाधान देश के पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम (सार्वजनिक परिवहन प्रणाली) को आधुनिक और सुलभ बनाना है। इसके साथ ही, वर्तमान में देश के वाहन मालिकों के सामने ईंधन को लेकर एक नई और गंभीर समस्या खड़ी हो गई है, जिसकी ओर ध्यान आकर्षित कराना चाहते हैं।। संस्था देश और प्रदेश हित में महत्वपूर्ण मांगें एवं तकनीकी बिंदुओं पर संस्था के संस्थापक राजीव वार्ष्णेय ने कहा कि प्रदूषण मुक्त पर्यावरण और सुगम यातायात के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय और उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम मिलकर देश के प्रत्येक जिले और उसकी सभी तहसीलों को जोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक सिटी बसों का संचालन शुरू करें। मुख्य संरक्षक व मार्गदर्शक राकेश बल्लभ वशिष्ठ सरकार का गंभीर ध्यानाकर्षण कराते हुए मांग करते हैं कि वर्तमान में पेट्रोल-डीजल में जो भारी मात्रा में इथेनॉल मिलाया जा रहा है, वह आज देश के गाड़ी मालिकों के लिए एक बहुत बड़ी समस्या बन चुका है क्योंकि पुराने वाहनों के इंजन इस ईंधन के अनुकूल नहीं हैं, जिससे इंजनों में जंग, पाइपलाइनों में खराबी, माइलेज में भारी कमी और वाहनों के बार-बार खराब होने से मालिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है, इसलिए सरकार ईंधन की गुणवत्ता सुनिश्चित करे, इथेनॉल के दुष्प्रभावों से इंजनों को बचाने की तकनीक (E20+ Compatible Parts) सुलभ कराए, अथवा वाहन स्वामियों को सामान्य ईंधन का विकल्प भी प्रदान करे।
इसी क्रम में यातायात और जाम से मुक्ति की राष्ट्रीय कार्ययोजना के तहत जिलाध्यक्ष नारायण लाल ने मांग की है कि यदि तहसील स्तर तक सरकारी इलेक्ट्रिक बसों का जाल बिछ जाता है, तो सड़कों पर निजी वाहनों का दबाव 50 प्रतिशत तक कम हो जाएगा, जिससे हर शहर में रोजाना लगने वाले जाम और ईंधन की बर्बाद होने से देश को मुक्ति मिलेगी। प्रदूषण नियंत्रण और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के संबंध में जिला महामंत्री कन्हैया वार्ष्णेय का विशेष आग्रह है कि इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से कार्बन उत्सर्जन शून्य होगा, जिससे शहरों की आबोहवा सुधरेगी, अतः फेम योजना के तहत जिलों और तहसीलों को विशेष सब्सिडी देकर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाए।
आम जनता, छात्रों व आर्थिक कमजोर वर्ग को राहत देने के विषय में जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेंद्र वार्ष्णेय की अनुशंसा है कि ग्रामीण और तहसील स्तर के नागरिकों, दैनिक मजदूरों और छात्रों के लिए यह सरकारी बस सेवा बेहद किफायती और सुरक्षित साबित होगी तथा इन बसों में महिलाओं की सुरक्षा हेतु सीसीटीवी व पैनिक बटन अनिवार्य रूप से लगाए जाएं। बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए जिला कोषाध्यक्ष लोकेश अग्रवाल की मांग है कि प्रत्येक तहसील और जिला मुख्यालय पर आधुनिक इलेक्ट्रिक बस डिपो और चार्जिंग स्टेशन बनाने के लिए सरकार अपने आगामी बजट में विशेष वित्तीय प्रावधान करे।। पब्लिक ट्रांसपोर्ट का यह आधुनिक विस्तार और इथेनॉल ईंधन से त्रस्त वाहन मालिकों को राहत देना, दोनों ही कदम देश की प्रगति और आम नागरिक के कल्याण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। मानव कल्याण सामाजिक संस्था को पूर्ण विश्वास है कि लोकहित में आप इन मांगों पर तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों को उचित दिशा-निर्देश जारी करेंगे।









