
हाथरस। आरटीआई कार्यकर्ता एसोशियेसन के जिलाध्यक्ष राजीव वार्षोय ने पुलिस एवं परिवहन विभाग में चालान प्रथा को समाप्त कर जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार पर पूर्ण रोक लगाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन भेजा गया है।
आरटीआई कार्यकर्ता एसोशियेसन के जिलाध्यक्ष राजीव वार्षोय ने ज्ञापन में कहा है कि राज्य के आम नागरिकों, वाहन चालकों, मध्यमवर्गीय परिवारों और छोटे व्यापारियों की एक अत्यंत गंभीर व व्यावहारिक हैं। वर्तमान व्यवस्था में पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा सड़कों पर चलाई जा रही अनियंत्रित चालान प्रथा सुधारात्मक होने के बजाय दंडात्मक और उत्पीड़न का जरिया बन चुकी है। सुरक्षा और नियम पालन के नाम पर शुरू की गई यह व्यवस्था अब जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार का सबसे मुख्य स्रोत बन चुकी है।
एक सामाजिक संगठन और आरटीआई कार्यकर्ताओं के प्रतिनिधि के रूप में, विभिन्न माध्यमों से हमारे सामने यह तथ्य आया है कि सड़कों पर होने वाली सघन चेकिंग का मुख्य उद्देश्य यातायात सुधार नहीं, बल्कि अवैध वसूली या भारी-भरकम चालान का डर दिखाकर अनुचित लाभ कमाना रह गया है।
ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने कहा है कि सड़कों पर पुलिस कर्मियों द्वारा वाहनों को रोककर भारी जुर्माने का भय दिखाया जाता है, जिसके कारण आम नागरिक कानूनी उलझनों से बचने के लिए मौके पर ही अवैध लेन-देन करने को मजबूर होते हैं। गरीब मजदूर, किसान और छोटे व्यावसायिक वाहन चालक, जो दैनिक आजीविका के लिए संघर्ष कर रहे हैं, उन्हें मामूली तकनीकी कारणों (जैसे भौतिक दस्तावेज साथ न होना) के लिए भी हजारों रुपये के आर्थिक दंड से प्रताड़ित किया जाता है। यातायात विभाग का मुख्य ध्येय नागरिकों में सुरक्षा और चेतना जागृत करना होना चाहिए, न कि विभाग के लिए मासिक राजस्व का टार्गेट पूरा करना है।
संगठन ने मांगें और सुधारात्मक सुझाव के तहत ऑन-द-स्पॉट नकद चालान पर तत्काल रोक लगे। सड़कों पर पुलिस कर्मियों द्वारा नकद चालान काटने की प्रथा को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए, ताकि पुलिस और जनता के बीच सीधे वित्तीय लेन-देन की संभावना और भ्रष्टाचार समाप्त हो सके।पूर्णतः डिजिटल एवं ऑटोमैटिक व्यवस्था में नियम उल्लंघन की स्थिति में केवल आधुनिक तकनीक जैसे सीसीटीवी कैमरे, स्पीड रडार और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन के माध्यम से ही ई-चालान सीधे वाहन स्वामी के पंजीकृत पते या मोबाइल पर भेजा जाए। सड़कों पर गाड़ियां रोककर यातायात बाधित न किया जाए। यदि किसी नागरिक का पहली या दूसरी बार मामूली नियम टूटता है, तो सीधे भारी जुर्माना लगाने के बजाय डिजिटल चेतावनी या आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने हेतु समय सीमा प्रदान की जाए। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की पूर्ण स्वीकार्यता हो।
आरटीआई कार्यकर्ता संगठन ने कहा है कि मुख्यमंत्री एंव सरकार की सदैव जीरो टॉलरेंस नीति और भ्रष्टाचार मुक्त पारदर्शी शासन के लिए प्रतिबद्ध रही है।इस जनविरोधी चालान प्रथा में आमूलचूल परिवर्तन करने से न केवल भ्रष्टाचार का समूल नाश होगा, बल्कि प्रदेश की न्यायप्रिय जनता का शासन और कानून व्यवस्था के प्रति विश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा।









