
सासनी। कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष विवेक उपाध्याय को पुलिस प्रशासन द्वारा उनके घर पर नजर बंद कर दिया गया और उन्हें नजर बंद किए जाने पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष द्वारा तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई है।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष विवेक उपाध्याय ने कहा है कि कल रात्रि लगभग 10 बजे से मुझे बिना किसी वैधानिक आधार और बिना किसी लिखित आदेश के पुलिस द्वारा मेरे ही घर में रोक कर रखा गया। रात भर पुलिसकर्मी मेरे घर पर मौजूद रहे, लेकिन उनके पास ना कोई आधिकारिक पत्र था, ना कोई नोटिस और ना ही कोई स्पष्ट कारण कि आखिर मुझे किस अधिकार के तहत हाउस अरेस्ट किया गया है। उन्होंने कहा है कि मैंने स्वयं कोतवाली प्रभारी विपिन चौधरी से फ़ोन पर बात कर पूछा कि आखिर मुझे क्यों रोका जा रहा है और इस कार्यवाही का आधार क्या है? लेकिन उनकी तरफ़ से भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। केवल इतना कहा गया कि नॉर्मल तरीके से मिलने के लिए पुलिस भेजी गई है।
उन्होंने कहा है कि अगर यह सिर्फ़ एक सामान्य मुलाकात थी, तो फिर रात भर पुलिस बल का मेरे घर पर मौजूद रहना किस बात का संकेत है? लोकतंत्र में क्या अब विपक्ष की आवाज़ उठाना अपराध बन चुका है? क्या जनता की समस्याओं को उठाने वाले नेताओं को इस तरह मानसिक दबाव में रखने की कोशिश की जाएगी? । मैं लगातार जनता के मुद्दों बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार, पेपर लीक, प्रदूषण, किसानों और युवाओं की समस्याओं को मजबूती से उठाता रहा हूँ। शायद यही बात सत्ता और प्रशासन को असहज कर रही है। लेकिन मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि कांग्रेस का कार्यकर्ता डरने वाला नहीं है। लोकतंत्र में जनता की आवाज़ को दबाने का हर प्रयास जनता खुद जवाब देकर विफल करेगी।
आज सवाल केवल विवेक उपाध्याय का नहीं है। सवाल यह है कि क्या उत्तर प्रदेश में विपक्ष के नेताओं और कार्यकर्ताओं को बिना आदेश, बिना कारण और बिना कानूनी प्रक्रिया के इस तरह रोका जाएगा? अगर प्रशासन के पास कोई कारण है तो उसे सार्वजनिक करना चाहिए। अगर कोई आदेश है तो उसे दिखाना चाहिए।लोकतंत्र संविधान से चलता है, डर और दबाव से नहीं।
मैं प्रशासन से मांग करता हूँ कि इस पूरे मामले पर तत्काल स्पष्ट जवाब दिया जाए और इस प्रकार की अलोकतांत्रिक कार्यवाही बंद की जाए।









