मृदा स्वास्थ्य के लिए हरी खाद का महत्व: तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम

सिकंदराराऊ । 4 से 6 मई तक कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) में ‘मृदा स्वास्थ्य के लिए हरी खाद का महत्व’ विषय पर एक विशेष तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम केवीके के प्रभारी डॉ. एस.आर. सिंह के कुशल निर्देशन में संपन्न हुआ। जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों को मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और रसायनों के कम उपयोग के प्रति जागरूक करना था। इस कार्यक्रम के दौरान डॉ. बलवीर सिंह और डॉ. आकांक्षा ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई और विशेषज्ञों के रूप में किसानों का मार्गदर्शन किया। प्रशिक्षण के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि लगातार रासायनिक खादों के प्रयोग से मिट्टी की जैविक शक्ति कम हो रही है । जिसे बहाल करने के लिए ‘हरी खाद’ (जैसे ढैंचा और सनई) एक सर्वोत्तम विकल्प है। डॉ. बलवीर सिंह ने अपने संबोधन में बताया कि हरी खाद न केवल मिट्टी को नाइट्रोजन प्रदान करती है, बल्कि उसकी जलधारण क्षमता और संरचना में भी सुधार करती है। डॉ. आकांक्षा ने किसानों को हरी खाद उगाने की तकनीक, उसे खेत में पलटने के सही समय और उससे होने वाले दीर्घकालिक आर्थिक लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। तीन दिनों तक चले इस सत्र में क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और मिट्टी की सेहत सुधारने का संकल्प लिया।

Dainik Lalsa
Author: Dainik Lalsa

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