
हाथरस-26 जनवरी। यूजीसी के छात्र-विरोधी, शिक्षा-विरोधी एवं हिंदू एकता में विघटन पैदा करने वाले काले कानूनों को तत्काल समाप्त करने के संबंध में अखिल भारतीय वैश्य महासम्मेलन के जिलाध्यक्ष एवं वरिष्ठ व्यापारी नेता कन्हैया वार्ष्णेय तेल वालों द्वारा देश के प्रधानमंत्री को कड़ा पत्र लिखकर उक्त कानून को समाप्त करने की मांग की गई है ।
अखिल भारतीय वैश्य महासम्मेलन के जिलाध्यक्ष एवं वरिष्ठ व्यापारी नेता कन्हैया वार्ष्णेय तेल वालों द्वारा पत्र में कहा गया है कि किसी औपचारिक शिष्टाचार के लिए नहीं, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों, शिक्षकों और जागरूक नागरिकों के आक्रोश की अभिव्यक्ति है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा लागू किए गए नए नियम आज केवल शिक्षा-विरोधी ही नहीं, बल्कि छात्र-विरोधी और सामाजिक एकता को कमजोर करने वाले काले कानून बन चुके हैं। यूजीसी की नीतियाँ छात्रों को शिक्षा से जोड़ने के बजाय उन्हें हतोत्साहित, भ्रमित और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही हैं। बढ़ती फीस, अस्थिर पाठ्यक्रम, शोध पर अनावश्यक नियंत्रण और रोजगार-विहीन शिक्षा ने छात्रों को आंदोलन की राह पर धकेल दिया है। यह सीधा-सीधा छात्र विरोधी एजेंडा है, जिसे किसी भी स्थिति में राष्ट्रहित नहीं कहा जा सकता।
पत्र में उन्होंने कहा है कि और इससे भी अधिक गंभीर तथ्य यह है कि यूजीसी की नीतियाँ शिक्षा परिसरों में वैचारिक टकराव, भ्रम और विभाजन को बढ़ावा देकर हिंदू समाज की एकता को कमजोर करने में विघटनकारी भूमिका निभा रही हैं। भारतीय संस्कृति, परंपरा और सनातन मूल्यों से कटे हुए शिक्षा मॉडल को जबरन थोपकर युवाओं को अपनी जड़ों से अलग किया जा रहा है। यह न केवल सांस्कृतिक आक्रमण है, बल्कि सामाजिक एकता पर सीधा प्रहार भी है।
प्रधानमंत्री जी,आप “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” और “सांस्कृतिक राष्ट्रवाद” की बात करते हैं, जबकि आपकी ही सरकार के अंतर्गत यूजीसी ऐसी नीतियाँ लागू कर रहा है जो छात्रों को तोड़ रही हैं, शिक्षकों को अपमानित कर रही हैं और हिंदू समाज की वैचारिक एकता को कमजोर कर रही हैं। यदि यही स्थिति रही, तो यह केवल शिक्षा का नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया का भी पतन होगा।
अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार छात्रों के आंदोलनों, शिक्षकों की चेतावनियों और समाज के विरोध को अनदेखा कर यूजीसी को निरंकुश बनाए हुए है। लोकतंत्र में यह हठधर्मिता अस्वीकार्य है।स्पष्ट चेतावनी देते हैं कि यदि यूजीसी के ये छात्र-विरोधी, शिक्षा-विरोधी और हिंदू समाज को बाँटने वाले काले कानून तत्काल वापस नहीं लिए गए तो देश-व्यापी जनांदोलन और लोकतांत्रिक संघर्ष को और तेज़ किया जाएगा,जिसकी पूर्ण नैतिक और राजनीतिक ज़िम्मेदारी केंद्र सरकार और यूजीसी की होगी।
उन्होंने मांग की है कि यूजीसी के सभी काले, जनविरोधी और छात्र-विरोधी कानूनों को तुरंत समाप्त किया जाए।शिक्षा को भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों और सामाजिक एकता के अनुरूप पुनर्गठित किया जाए।छात्रों के भविष्य, शिक्षकों की गरिमा और हिंदू समाज की वैचारिक एकता की रक्षा सुनिश्चित की जाए। आने वाली पीढ़ियाँ इस शिक्षा-विनाश के लिए सत्ता को दोषी ठहराएँगी।
मांग करने वालों में अखिल भारतीय वैश्य महासम्मेलन के जिलाध्यक्ष एवं वरिष्ठ व्यापारी नेता कन्हैया वार्ष्णेय तेल वालों के अलावा मानव कल्याण सामाजिक संस्था के संस्थापक राजीव वार्ष्णेय, वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष राजेंद्र वार्ष्णेय, बालप्रकाश वार्ष्णेय, अतुल चौधरी आदि शामिल हैं।









