यह यह चंद्र ग्रहण भारतीय समय अनुसार दिन में दो बजकर चैदह मिनट से प्रारंभ होगा जो की तीन बजकर बीस मिनट पर स्पष्ट रूप से शुरू होगा इसका मध्य पांच बजकर चार मिनट और इसका समापन साइन कल छह बजकर पचास मिनट पर होगा। यह चंद्र ग्रहण पूर्वोत्तर राज्य असम, मेघालय, मिजोरम इत्यादि प्रदेशों में दिखाई देगा क्योंकि वहां पर चंद्रोदय पहले हो जाता है सूर्य जल्दी छुप जाता है। चूंकि भारत में दिखाई दे देगा इसलिए संपूर्ण भारत में इसकी है मान्य रहेगा
मंगलवार को यह जानकारी देते हुए शिव शक्ति आराधना ज्योतिष केन्द्र के आचार्य पंडित खगेन्द्र शास्त्री ने बताया कि चंद्रग्रहण के सूतक तीन मार्च 2026 को प्रातः छह बजकर पंद्रह मिनट से प्रारम्भ हो जाएगी। सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे बाल वृद्धि रोगी आसक्त जन्म और गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष ध्यान देने योग्य है गर्भवती महिलाएं तीक्ष्ण भोजन, चाकू, छुरी, सुई, का स्तेमाल न करें न सूतक काल मै शयन इत्यादि भी वर्जित है। उन्होंने बताया कि होलिका दहन संवत 2082 फाल्गुन शुक्ल पक्ष चतुर्दशी दो मार्च 2026 सोमवार को प्रदोष काल में पूर्णिमा रात्रि में दो बजकर तीस मिनट पर होलिका दहन किया जाना उत्तम है। दो मार्च को सायं काल से ही भद्रा भी प्रारम्भ हो रही है, अतः धर्मसिंधु के अनुसार होलिका दहन पूर्व मै ही होगा इदं चंद्रग्रहणसत्वे वेधमध्ये कायर्म ग्रस्तोदये प्ररदिने प्रदोषे पूणिमासत्वे ग्रहणमध्य एव कार्यम् अन्यथा पूर्व दिन। अर्थात यदि दूसरे दिन ग्रहण हो और प्रदोष काल में पूर्णिमा न हो तो पूर्व दिन ही होलिका पूजन करें। यदि भद्रा हो तो भद्रा में ही प्रदोष के समय भद्र का मुख छोड़कर पूछ मै होलिका दहन करें दो मार्च को भद्रा शाम पांच बजकर तीस मिनट से प्रारम्भ होकर सुबह पांच बजकर तीस मिनट तक रहेगी इसलिये इसकी पूछ में अर्थात रात्रि दो बजकर तीस मिनट पर होलिका दहन शास्त्रोंत है। उन्होंने बताया कि पूजन दो मार्च सोमवार को सुबह दस बजे के बाद शुभ है, और होलिका दहन दो मार्च सोमवार रात्रि दो बजकर तीस मिनट पर शुभ है।









