सिकंदराराऊ । रावण दहन के बाद घर-घर टेसू – झांझी महोत्सव का दौर शुरू हो जाता है । इस परंपरा का निर्वाह बच्चे करते हैं। इस महोत्सव को छः दिनो तक मनाया जाता है । पूर्णिमा के दिन टेसू व झाँझी को विसर्जित किया जाता है । शाम होते ही गली मोहल्ले में बच्चों की टोलियां टेसू और झांसी को लेकर भ्रमण करते हुए नजर आने लगी है । बच्चों की टोलियां टेसू और झांसी में मोमबत्ती एवं दीपक जलाकर इनका विवाह कराने को घरों में नेक मांगते दिखाई देते है । मेरा टेसू यही खड़ा , खाने को मांगे दही बड़ा , टेसूरा ,टेसूरा घंटा बजैयो , नौ नगरी दस गांव बसइयो , टेसू के रे टेसू के चार पंगोली के उड़ गए तीतर , उड़ गए मोर जैसे तुकबंदी के गीत गाते है।
उपहार मिलने पर छोटे छोटे बच्चे आशीष देते हैं। नेग न मिलने पर बच्चे तुकबंदी गालियां देते निकल जाते हैं। बुजुर्गो के दौर से चली आ रही परंपरा को बच्चे आज भी बखूभी निभा रहे है। प्रचलित कथा महाभारत का युद्ध चल रहा था । कर्ण ने अर्जुन का वध करने के लिए अमोघ अस्त्र संभाल कर रख लिया । यह पांडवो के लिए सोचनीय था । इससे बचने के लिए श्रीकृष्ण ने मार्ग खोजा । हिडिम्बा से उत्पन्न भीम के पुत्र बबरूवाहन को बुलाया गया । जब उसे युद्ध करने को भेजा गया तो कौरव सेना में खलबली मच गई , क्योंकि इस योद्धा के सामने जो पड़ा उसका उसने संहार कर दिया । तब कर्ण को अर्जुन के लिए रखे अमोघ अस्त्र का प्रयोग बबरूवाहन पर करना पड़ा । इधर बबरूवाहन श्री कृष्ण से पहले ही यह वरदान प्राप्त कर चुका था । कि वह पूरी महाभारत अपनी आंखो से देखेगा ।












