हाथरस। सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज लेबर कॉलोनी में शिक्षक दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गुरु की महिमा, शिक्षा के महत्व, प्रकृति संरक्षण, पाश्चात्य संस्कृति एवं आधुनिक शिक्षा के अंतर तथा समाज में व्याप्त विभिन्न विकृतियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर वक्ताओं ने अपने विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रबंधक मनोज अग्निहोत्री ने की तथा कार्यक्रम का संचालन आचार्य राजेश शर्मा ने किया। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु जैसे पवित्र श्लोक से करते हुए गुरु की महिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने तुलसीदास जी द्वारा गुरु की महिमा के वर्णन का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षक यदि चाहे तो किसी भी विषय की दशा और दिशा बदल सकता है। शिक्षक केवल ज्ञान प्रदान करने वाला नहीं, बल्कि विद्यार्थी के व्यक्तित्व और चरित्र का निर्माण करने वाला मार्गदर्शक भी है।उन्होंने अपने संबोधन में जीवन के मूल्यों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि धन और स्वास्थ्य से अधिक महत्वपूर्ण व्यक्ति का चरित्र है, क्योंकि चरित्र ही उसके जीवन की वास्तविक पहचान है।
कार्यक्रम में डॉ. रोहिताश पाराशर ने प्रकृति के स्वभाव एवं मनुष्य के साथ उसके संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रकृति के संरक्षण और उसके संतुलन को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि प्रकृति के प्रति संवेदनशील होना प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है।
कार्यक्रम में डॉ. श्रीमती अनुपम भारद्वाज ने पाश्चात्य संस्कृति और आधुनिक शिक्षा के अंतर को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा एवं तकनीक को अपनाते हुए भारतीय संस्कृति, संस्कार और नैतिक मूल्यों को बनाए रखना आवश्यक है। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि संस्कारवान और चरित्रवान नागरिक तैयार करना भी है।
पाण्डेय जी ने अभिभावकों की शिक्षा के प्रति अनभिज्ञता तथा समाज में फैल रही विभिन्न सामाजिक विकृतियों पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए विद्यालय और परिवार दोनों का सक्रिय सहयोग आवश्यक है।
कार्यक्रम की सर्व व्यवस्था प्रमुख एवं उप प्रधानाचार्य सतीश सारस्वत थे। उनके मार्गदर्शन में कार्यक्रम की सभी व्यवस्थाएँ सुचारु रूप से संपन्न हुईं।
शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में शिक्षकों की भूमिका, शिक्षा के उद्देश्य, संस्कार एवं चरित्र निर्माण पर सार्थक चर्चा हुई। कार्यक्रम ने सभी लोगों को यह संदेश दिया कि एक शिक्षक केवल विद्यार्थी का भविष्य ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की दिशा भी बदलने की क्षमता रखता है।












