प्राइवेट नौकरी छोड़ केदारनाथ धाम की कठिन दंडवत यात्रा पर निकले बालाघाट के दो युवा विश्व शांति, पर्यावरण संरक्षण और बेटी सुरक्षा का संदेश दे रहे निर्मल उइके

प्रदेश के बालाघाट जिले के दो युवाओं ने भक्ति, राष्ट्र सेवा और सामाजिक सरोकार की एक अनूठी मिसाल पेश की है। जिले की बिरसा तहसील के ग्राम भटलई निवासी सुखनंदन उइके के 25 वर्षीय पुत्र निर्मल उइके बाबा केदारनाथ के दर्शन के लिए बेहद कठिन दंडवत यात्राश् पर निकले हैं। बीते 8 महीनों (243 दिन) से जारी इस कठिन साधना में उनका पूरा साथ उनके परम मित्र बालाघाट तहसील के ग्राम देवसर्रा के रहने वाले तुलेंद्र मड़ावी, दे रहे हैं।

दोनों युवाओं की पृष्ठभूमि बेहद प्रेरणादायक है। स्नातक (ग्रैजुएशन) की पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों दोस्तों ने पुणे स्थित महिंद्रा कंपनी में रोबोट ऑपरेटर के पद पर काम किया। आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने के बावजूद उनके मन में समाज और धर्म के प्रति कुछ बड़ा करने की तड़प थी। इसी सोच के साथ दोनों ने अपनी अच्छी-भली प्राइवेट नौकरी छोड़ दी और केदारनाथ धाम के लिए पैदल व दंडवत यात्रा का संकल्प लिया। इस कठिन तपस्या के पीछे केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि बड़े सामाजिक उद्देश्य भी छिपे हैं जिसमें वह यात्रा के दौरान दोनों युवा लोगों को प्रकृति बचाने और शांति का संदेश दे रहे हैं। भविष्य में एक आदर्श गौशाला और वृद्धाश्रम के निर्माण का सपना है। तथा समाज में बेटियों और बहनों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के साथ अपने और पूरे देश के कल्याण व उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना। जहाँ निर्मल उइके सड़क पर सीने के बल लेटकर एक-एक इंच दूरी तय करते हुए दंडवत प्रणाम कर आगे बढ़ रहे हैं, वहीं उनके साथी तुलेंद्र मड़ावी पैदल चलते हुए यात्रा की सारी व्यवस्थाएं और सामान संभालने का जिम्मा उठा रहे हैं। राह में जहाँ से भी यह जोड़ी गुजरती है, लोग इनकी आस्था, अटूट समर्पण और जनसेवा के संकल्प को देखकर नतमस्तक हो जाते हैं। स्थानीय निवासी और राहगीर जगह-जगह दोनों युवाओं पर पुष्पवर्षा कर और भोजन-पानी का प्रबंध कर उनका उत्साहवर्धन कर रहे हैं। युवाओं की यह तपस्या आज पूरे क्षेत्र में चर्चा और प्रेरणा का विषय बनी हुई है।

sunil sharma
Author: sunil sharma

REPORTER SASNI

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