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July 15, 2024 11:40 am

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दान पुण्य कर मनाया निर्जला भीमसैनी एकादशी का पर्व :श्रद्धालुओं ने जगह जगह वितरित किया मीठा शीतल शरबत

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सिकंद्राराऊ-18 जून। मंगलवार को कस्बा व क्षेत्र में निर्जला भीमसैनी एकादशी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। श्रद्धालुओं ने निर्जल उपवास रख भगवान विष्णु की आराधना कर दान पुण्य किया। पर्व के चलते जगह जगह श्रद्धालुओं द्वारा मीठा शीतल शरबत वितरित किया गया। निर्जला एकादशी हिंदू परंपराओं के अनुसार साल की 24 एकादशियों में सबसे महत्वपूर्ण है। निर्जला एकादशी व्रत के दौरान पानी पीना मना है। इसलिए इसे निर्जला एकादशी के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत करने से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार निर्जला एकादशी के दिन बिना जल के उपवास करने से वर्ष की शेष एकादशियों को पुण्य लाभ मिलता है। इस दिन निर्जल होकर भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है। एकादशी का दिन भगवान विष्णु को अति प्रिय है। इसलिए इस दिन निर्जल व्रत रहने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। पांडव भ्राता भीम ने एक मात्र इसी उपवास को रखा था और मूर्छित हो गए थे। इसलिए इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं। निर्जला एकादशी के दिन निर्जल रहकर भगवान विष्णु की आराधना करने से जीवन के संकटों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को रखने से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है।

dainiklalsa
Author: dainiklalsa

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