सिकंदराराऊ। भगवान श्रीकृष्ण ने भ्रमित अर्जुन के सामने कर्मयोग का मार्ग प्रशस्त करते हुए कहा कि तू निष्काम कर्मयोग कर। अनासक्त रहते हुए कर्म कर। फल की इच्छा से मुक्त रहते हुए कर्म कर; तेरे कर्म का परिणाम सृष्टि नियन्ता ने पूर्व से ही निर्धारित किया हुआ है। उक्त बातें कर्मयोग सेवा संघ के अध्यक्ष विवेकशील राघव ने कर्मयोग सेवा संघ के दशम स्थापना दिवस एवं विजयादशमी पर्व के अवसर पर कस्बा के मोहल्ला बगिया बारहसैनी में स्थित श्रीराधा कृष्ण पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान मंगलवार को कहीं। इस पावन पुनीत बेला पर हवन यज्ञ किया गया और शस्त्र पूजन भी किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी भद्रपाल सिंह चौहान ने तथा संचालन कवि प्रमोद विषधर ने किया। इस अवसर पर वरिष्ठ अधिवक्ता युवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज आवश्यकता परिवारों में पुनः एक सार्थक संवाद स्थापित करने की है। यदि परिवार बचेंगे तो धर्म बचेगा, धर्म बचेगा तो राष्ट्र बचेगा।
कर्मयोग सेवा संघ के संस्थापक सदस्य नरेश राघव ने कहा कि पिछले दस वर्ष में विवेकशील राघव के नेतृत्व और संगठन की विचारधारा के चलते संगठन 19 राज्यों के लगभग 200 जिलों तक पहुंचने में सफल हुआ है। सिकन्दराराऊ क्षेत्र की जनता को विवेकशील राघव जैसे नेतृत्व को आगे लाना चाहिए और यह विश्वास रखना चाहिए कि अपूर्व तरीके से क्षेत्र का सर्वांगीण विकास होगा। कार्यक्रम अध्यक्ष भद्रपाल सिंह चौहान ने कहा कि वर्तमान में सिकन्दराराऊ क्षेत्र नेतृत्वविहीन हो गया है। जनता की मनोदशा के अनुरूप एक नए नेतृत्व की आवश्यकता है जिसे सबका विश्वास प्राप्त हो।कार्यक्रम का आरम्भ वैदिक यज्ञ के साथ हुआ। कार्यक्रम के अंत मे शस्त्रपूजन तथा एक कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें, कवि ओमप्रकाश सिंह एडवोकेट, कवि सतेंद्र भारद्वाज सहित सभी कवियों ने ओजस्वी काव्यपाठ किया। इस मौके पर डॉ. प्रदीप गर्ग, स्वामी राजगिरि महाराज, मुकेश चौहान, शिशुपाल सिंह पुंढीर, मुकेश बघेल, जितेंद्र यादव, नागेन्द्र राणा, पंकज यादव, अवधराज सिंह बघेल, विनय पचौरी, संतोष पुंढीर, अभय प्रताप, अनन्त राघव, सुशील चौहान, मनोज परमार आदि मौजूद रहे।












