मानव कल्याण संस्था ने की मिलावट खोरी पर नकेल कसने के लिए जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने की मांग

हाथरस। मानव कल्याण सामाजिक संस्था ने मिलावट खोरी पर नकेल कसने के लिए देश को आईएएस तुकाराम मुंढे जैसे सख्त और ईमानदार अधिकारी की जरूरत को बताया है।
मानव कल्याण सामाजिक संस्था ने कहा है कि महाराष्ट्र में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) कमिश्नर आईएएस तुकाराम मुंढे द्वारा मिलावटखोरों के खिलाफ छेड़े गए सख्त अभियान का मानव कल्याण सामाजिक संस्था ने जोरदार स्वागत किया है। संस्था के पदाधिकारियों ने कहा कि खाद्य पदार्थों में मिलावट आज जनस्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी है और पूरे देश में ऐसी ही निर्णायक कार्यवाही की सख्त जरूरत है।
संस्था के संस्थापक राजीव वार्ष्णेय एवं मुख्य संरक्षक राकेश बल्लभ वशिष्ठ ने कहा है कि आईएएस तुकाराम मुंढे ने यह साबित कर दिया है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो बड़े-बड़े होटलों से लेकर स्ट्रीट वेंडर्स तक नियमों का पालन करने पर मजबूर हो जाते हैं। आज देश के हर राज्य और जिले में ऐसे ही कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों की जरूरत है, ताकि आम जनता की थाली तक पहुंचने वाला भोजन पूरी तरह सुरक्षित और शुद्ध हो सके।
जिलाध्यक्ष नारायण लाल एवं जिला महामंत्री कन्हैया वार्ष्णेय ने जोर देते हुए कहा है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट केवल व्यापारिक बेईमानी नहीं, बल्कि सीधे तौर पर मानव जीवन के साथ किया जाने वाला खिलवाड़ है। महाराष्ट्र में रेस्टोरेंटों के लाइसेंस निरस्त होने, हानिकारक सिंथेटिक रंगों पर रोक और अखबारों में खाना परोसने पर लगी पाबंदी जैसे कदम पूरे देश के प्रशासनिक विभागों के लिए एक मिसाल हैं।
जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेंद्र वार्ष्णेय एवं जिला कोषाध्यक्ष लोकेश अग्रवाल ने कहा है कि सिंथेटिक दूध, केमिकल युक्त मसाले, मिलावटी तेल और केमिकल से पके फल आज बाजार में खुलेआम बिक रहे हैं।मुनाफाखोरी के इस तंत्र को तोड़ने के लिए प्रशासन को शून्य सहनशीलता की नीति अपनानी होगी।

नगर अध्यक्ष नरेश अग्रवाल एवं नगर महामंत्री कृष्णागोपाल ने कहा कि मिलावटी और असुरक्षित खानपान के कारण समाज का हर वर्ग प्रभावित हो रहा है। विशेष रूप से स्कूलों और कॉलेजों के आसपास बिकने वाले जंक फूड और मिलावटी स्ट्रीट फूड से हमारी युवा पीढ़ी की सेहत तेजी से बिगड़ रही है।नगर कोषाध्यक्ष पुनीत पोद्दार ने कहा कि मिलावटखोरों पर जब तक त्वरित और कठोर दंडात्मक कार्यवाही नहीं होगी, तब तक जनस्वास्थ्य की रक्षा संभव नहीं है। प्रशासनिक सख्ती ही नागरिकों को सुरक्षित भोजन का अधिकार दिला सकती है।
संस्था ने विशेष रूप से पैकेज्ड और खुले बिकने वाले नमकीन के निर्माण पर गहरी चिंता व्यक्त की। बाजार में उपलब्ध अधिकांश नमकीन को बार-बार गर्म किए गए, जले हुए व घटिया पाम ऑयल/ट्रांस-फैट तेल में तला जाता है, जो शरीर में सीधे टॉक्सिन्स (विषाक्त पदार्थ) पैदा करता है। आकर्षक और चटकीला रंग देने के लिए इनमें प्रतिबंधित सिंथेटिक इंडस्ट्रियल डाइ और केमिकल्स (जैसे मेटानिल येलो, टार्ट्राजिन) मिलाए जा रहे हैं, साथ ही स्वाद बढ़ाने के लिए मिलावटी, कीटनाशक युक्त व बासी मसालों का प्रयोग हो रहा है। चाय के साथ हर घर में रोज खाई जाने वाली यह नमकीन धीरे-धीरे धीमा जहर (स्लो पॉइजन) साबित हो रही है, जिससे लिवर डैमेज, एसिडिटी, आंतों में अल्सर और कम उम्र में ही कोलेस्ट्रॉल व दिल का दौरा पड़ने का खतरा कई गुना बढ़ गया है। संस्था ने मांग की है कि नमकीन निर्माण इकाइयों की सघन जांच कर सैंपल फेल होने पर कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाए।

Dainik Lalsa
Author: Dainik Lalsa

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