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June 20, 2024 5:27 am

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मूर्खिस्तान में आशु कवि अनिल बौहरे तथा चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य की फांय फांय में डा.मुरारीलाल ने महामूर्ख की उपाधि पर झपट्टा मारा

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हाथरस-2 अप्रैल। विदेशों में विभिन्न धारणाओं से सैकड़ांे बर्ष से मनाया जाने बाला मूरख दिवस जिसे हिन्दुस्तान में हास्य सम्राट काका हाथरसी ने प्रथम बार हाथरस में 1959 में प्रारम्भ कर अपने जीवनकाल में निरन्तर जारी रखा उसे आज बृज कला केन्द्र तथा राष्ट्रीय कवि संगम के बैनर तले आशु कवि अखिल बौहरे तथा चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य अपने साथ निरन्तर मनाने की मूरखता कर रहे हैं। इस बरष मूर्खिस्तान सरकार को प्रमिला-अजय गौङ ने लक्ष्मीनगर स्थित अपने आर एच कान्वेंट स्कूल में स्थापित करने की मूर्खता कर चार चांद पर मूर्ख भिजवा दिये।
महामूर्खाचार्य आशु कवि अनिल बौहरे के मूर्खमयी निर्देशन मे जिनके बनाये पुल उद्घाटन से पहले टूट जाते हैं उन्हें मूर्खिस्तान मंत्रिमंडल में लेने का आदेश दिया।
हुक्का को सिगरेट ने जो क्षति पहुंचाई उस पर सीबी हाई झांच करेगी। हुक्का का निचला हिस्सा पानी ही पानी यानी यानी समुद्र, बीच मे धरती गर्म करती आग, ऊपर आसमान में प्रदूषण का बाप धुंआ है। ऐसे विश्व दर्शी तथा पूरी महफिल का अकेले ही काम चलाने बाले समाज वादी हुक्के की दुर्दशा पर सारे मूरख रोते रोते हुक्का पकड़कर बैठ गये।
मूर्खिस्तान में पट्टी सिलेट की घनघोर उपेक्षा से गुरूकुल चैपट करने की मूरखता बाले चीपट्टानन्द को हैजूकेसन मंत्री बनाया।
मूर्खिस्तान में मटका सुराई की विदाई मेफ्रिज का षडयन्त्र मिला। मठ्ठा बंद कर चाय लाने की मूर्खता अंग्रेजी चमचों ने की। मुलतानी मिट्टी,रीठा से नहाना बन्द करने की मूर्खता मूर्खिस्तान में की गई है।
महामूर्ख के पद की दौड में मूर्खिस्तान में भगदड मच गई सारे मूरख अपनी अपनी मूरखता पै पडौसी की ताल ठोंक झूम रहे थे। तभी मूर्खिस्तान का गधा सेडूराजा ढेचूं ढेचूं करके बोला कि बिना कारण हंसा हंसा के जो पेट फडवा दे वो डा मुरारीलाल अग्रवाल अपनी सारी दौलत लिटाकर महामूर्ख घोषित किये जाते। फिर तो सारे के सारे मूर्ख मूर्खिस्तान के महामूर्ख डा मुरारीलाल के झैकारे लगाने लगे।
महामूर्खाचार्य अनिल बौहरे ने मूर्खों से मूरखता प्रस्तुतकराई।
मीरा दीक्षित अध्यक्ष की कुर्सी पर लटक गईं। सारारारा का शोर करती नजरों में काजल घुसेड रही थीं।
मनु दीक्षित का था यही दावा। मूर्खिस्तान में है मूर्खों का ढावा।
रूपम कुशवाह तो मूरखों की बीबीयों के हाथ मोडकर पीछे ही पर गर्व।
निशा गुप्ता की मूरखता छा रही थी तो सोनाली गुप्ता मूर्खिस्तान में आगे मूरख पीछे मूरख, मूर्खिस्तान महान है पर ठुमके लगवा रहीं थीं।
अंजली अग्निहोत्री मूर्खिस्तान की पोल खोल रही थीं कि कम काम का ज्यादा वेतन ज्यादा काम का आथा वेतन यहां मिलता। मूर्खिस्तान में गथा का शासन चलता।
दीपक रफी बौंक रहे कि मूर्खिस्तान में अब नाय मिलत बूरौ खायबे कौ नौतौ।
विजय सिंह प्रेमी कह रहै मेरे हुक्का को पानी तम्बाकू नहीं मिलता है, मूर्खिस्तान मे केंसरकारी सिगरेट का रुतबा चलता है।
स्वतंत्र कुमार गुप्त तो कह रहे मूर्खिस्तान का जूता महान, सर पर इसका स्थान।
श्याम बाबू चिन्तन, प्रभू दयाल दीक्षित प्रभू, डा जितेन्द्र शर्मा, गोपाल चतुर्वेदी, देवी सिंह निडर आदि मूर्खिस्तान की आपाधापी में कोई नायब तो कोई गायब की स्थित में थे। कोई तो अपनी मूर्खिस्तान में ही मूरख राग गा रहा कोई विदेश जाकर डकरा रहा। कार्यक्रम में डॉक्टर मुरारी लाल, स्वतंत्र कुमार गुप्त, आशु कवि अनिल बोहरे एवं चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने कार्यक्रम में प्रतीकात्मक रूप से मौजूद गधे की पूजा आरती माला पहनकर स्वागत किया।
कार्यक्रम का अंत सहामूर्ख डा मुरारीलाल के राग गर्दभी तथा प्रदूषण पर्याबरण के चीरहरण में सभी मूर्खों को हरयाली पत्ती माला गलों में लटकाकर हुआ।
कार्यक्रम में हरिशंकर वर्मा, बाला शर्मा, अनु विमल, बालकिशन शर्मा उर्फ बालो गुरू, रामगोपाल दीक्षित चाचा हाथरसी, रामेश्वर सारस्वत, जय प्रकाश तिवारी राजेंद्र प्रसाद गोपाल वाष्र्णेय सौरभ जैन पंडित गोपाल शर्मा जेके शर्मा आदि मूर्ख मौजूद रहे।

dainiklalsa
Author: dainiklalsa

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