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June 13, 2024 12:19 am

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अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन में गूंजी कवियों की वाणीःदीं श्रद्धांजलि

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ब्रजभाषा के प्रख्यात स्तम्भ साहित्यकार स्व. डा. जगदीश लवानियां की तृतीय पुण्य स्मृति में आयोजित


हाथरस-26 अप्रैल। ब्रजभाषा के मूर्धन्य कवि वरिष्ठ स्तम्भ साहित्यकार रहे स्व. डॉ. जगदीश लवानियां की तृतीय पुण्य स्मृति के अवसर पर स्व. डा. जगदीश लवानियां द्वारा सृजित संस्था ज्ञान कला संजीवनी समिति एवं साहित्यिक संस्था ब्रज कला केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में विराट अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन राधे गार्डन अलीगढ़ रोड पर आयोजित किया गया।

जिसमें देश के प्रख्यात व नामचीन कवियों द्वारा अपने काव्य पाठ के माध्यम से प्रख्यात स्तंभ साहित्यकार ब्रजभाषा के सशक्त हस्ताक्षर कवि स्वर्गीय डॉ. जगदीश लवानियां को काव्यांजलि के माध्यम से भावांजलि के साथ पुष्पांजलि अर्पित करते हुए श्रद्धांजलि दी गई। देश के प्रख्यात कवियों द्वारा काव्य पाठ के माध्यम से जहां श्रद्धांजलि दी गई। वहीं श्रोताओं को कभी हास्य के द्वारा गुदगुदाया तो कभी श्रृंगार रस में डुबकी लगबायी तो ओज के माध्यम से जोश भरते हुए जमकर तालियां बटोरीं।


ब्रजभाषा के प्रख्यात स्तंभ साहित्यकार एवं प्रख्यात कवि व ज्ञान कला संजीवनी समिति के संस्थापक स्वर्गीय डॉ. जगदीश लावानियां की तृतीय पुण्य स्मृति के उपलक्ष्य में एवं ब्रज कला केंद्र के सहयोग से ज्ञान कला संजीवनी समिति की सचिव व विराट अखिल भारतीय कवि सम्मेलन की संयोजक श्रीमती डॉक्टर प्रीति लवानिया (पुत्रवधु) के नेतृत्व में आयोजित विराट अखिल भारतीय कवि सम्मेलन कार्यक्रम की ब्रज कला केंद्र के राष्ट्रीय समन्वय विष्णु प्रकाश गोयल की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन कार्यक्रम संयोजिका डॉ. प्रीति प्रीति लवानिया एवं सहसंयोजक चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने संयुक्त रूप से किया। तो वहीं कवि सम्मेलन का संचालन देश के वरिष्ठ हास्य कवि सर्वेश अस्थाना ने किया। सर्वप्रथम कार्यक्रम अध्यक्ष विष्णु प्रकाश गोयल, कार्यक्रम आयोजक एवं असिस्टेंट कमिश्नर एक्साइज प्रगल्भ लवानियां, जीएम ललित लवानियां, शहर के प्रमुख समाजसेवी लक्ष्मीपति सेकसरिया, कर्नल मुकेश बाबू पाठक, ब्रजधाम समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष दीपक गोयल, ब्रज कला केंद्र के केंद्रीय कोषाध्यक्ष वीरेंद्र गोयल, ब्रज कला केंद्र के अध्यक्ष चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने दीप प्रज्जवलन कर मां शारदे एवं स्वर्गीय डॉ. जगदीश लवानिया के छवि चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। जहां एक और कार्यक्रम संयोजक डॉ. प्रीति लवानियां के संचालन में देश के पधारे तमाम कवियों का प्रतीक चिन्ह देकर स्वागत किया। वहीं कार्यक्रम सहसंयोजक चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के संचालन में ब्रज कला केंद्र के केंद्रीय पदाधिकारियों का कार्यक्रम आयोजक प्रगल्भ लवानियां एवं ललित लवानियां ने प्रतीक चिन्ह देकर स्वागत व सम्मान किया।

इसके उपरांत अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। जिसमें देश की लोकप्रिय रस सिद्ध कवियत्री एवं उर्दू अदब की लाडली बेटी अंजुम रहबर इंदौर ने सुनाया-एक बार के मिलने को जो प्यार समझते हैं, पागल हैं मगर खुद वह होशियार समझते हैं, यह ऊंचे घरानों के बिगड़े हुए लड़के हैं जो प्यार के मंदिर को बाजार समझते हैं। देश भक्ति एवं वीर रस के सशक्त कवि डॉ. कर्नल वीपी सिंह पुणे ने सुनाया-रक्त सड़कों पर बहा तो क्या, बहा रक्त तो वह है जो कहीं सीमा पर बहे, धर्म इसके रंग से लज्जित ना हो देश जिसके दान से जिंदा रहे।
हाथरस जनपद की शान व देश के मशहूर गीतकार डॉ. विष्णु सक्सेना सिकंद्राराऊ ने अपने गीत की प्रस्तुति में कहा-जो हाथ थाम ले वो फिर छूटने न पाए प्यार की दौलत है कोई लूटने ना पाए। जब भी छूलो बुलंदियां तो ध्यान यह रखना जमीं से पांव का रिश्ता न टूटने यह पाए। छंद कविता एवं भक्ति रस की सुप्रसिद्ध कवियत्री डॉ. सरिता शर्मा दिल्ली ने कहा-लहर जैसी चपलता तो मुझ में भी है, अनकही एक विकलता तो मुझ में भी है, मैं नदी हूं किनारांे में सिमटी मगर एक समंदर मचलता तो मुझ में भी है। कवि सम्मेलन एवं मुशायरा की जान मशहूर संजीदा शायर कुंवर जावेद कोटा ने कार्यक्रम में अद्भुत काव्य पाठ करते हुए कहा -मेरा परिचय बस इतना है कुंवर भी हूं जावेद भी हूं 1400 वर्षों से मुस्लिम तो सदियों से हिंदुस्तानी भी हूं। सुप्रसिद्ध हास्य कवि डॉ. अनिल चैबे बनारस ने सुनाया- नारी की रक्षा को गिद्ध भी युद्ध जहां निजी शक्ति यथा करते हैं धन्य है भारत देश जहां पर काग भी राम कथा करते हैं।
हास्य एवं रसीले कवि अखिलेश द्विवेदी इलाहाबाद ने कहा-हम अपना दर्द बांटे या ना बांटे पर हंसी बांटे, भूला कर सारे गम अपने सभी के संग खुशी बांटे। वीर रस के अद्भुत कवि अभय निर्भीक अंबेडकर नगर ने कहा-भारत माता का हरगिज सम्मान नहीं खोने देंगे, अपने पूज्य तिरंगे का अपमान नहीं होने देंगे सुनाकर जमकर वाहवाही एवं तालियां बटोरीं।
पूरा विराट अखिल भारतीय कवि सम्मेलन कार्यक्रम स्वर्गीय डॉ. जगदीश लवानियां को समर्पित रहा। कार्यक्रम का संचालन सुप्रसिद्ध मंच संचालक एवं हास्य व्यंगकार सर्वेश अस्थाना लखनऊ ने करते हुए सुनाया-रिश्तांे में तकरार बहुत है लेकिन इनमें प्यार बहुत है, सारी दुनिया खुश रखने को बस अपना परिवार बहुत है।
इस मौके पर अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी स्वर्गीय डॉ. जगदीश लवानिया पुरुस्कार किसी न किसी वरिष्ठ साहित्यकार को दिया जाता है और इसी क्रम में कार्यक्रम में डॉ. जगदीश लवानियां स्मृति सम्मान से डॉ. कर्नल बीपी सिंह (पुणे, महाराष्ट्र) को देते हुए 21 हजार रुपये की सम्मान राशि, प्रशस्ति पत्र एवं शॉल ओढ़ाकर स्वर्गीय लवानियां जी की पत्नी श्रीमती विमलेश लवानिया एवं उनके पुत्र प्रगल्भ लवानियां, ललित लवानियां, एवं पौत्र कृष्णा, शाश्वत, रुद्राक्ष एवं सुरेशचंद लवानियां, ज्ञानेंद्र लवानियां के साथ पूरे लवानियां परिवार ने सम्मानित किया। कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम की सफलता हेतु सहसंयोजक चंद्रगुप्त विक्रमादित्य को भी प्रतीक चिन्ह देकर लवानियां परिवार ने सम्मानित किया।
कार्यक्रम में अदिति लवानियां, ब्रजकिशोर शर्मा, डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा, अजय भारद्वाज एड., प्रेम सिंह यादव एड., डॉ. भरत यादव, डॉ. राजेश शर्मा, विजय सिंह प्रेमी, डा. रईस अहमद अब्बासी, इकबाल अहमद, मुस्ताक अहमद, आमना बेगम, संजय कप्तान, पं. अविनाशचंद्र पचैरी, हरीशंकर वर्मा, गिरिराज सिंह गहलौत, डा. मुकेश चन्द्रा, सुरेंद्र भाटिया, पं. ऋषि कुमार कौशिक, ठाकुर आकाश सिंह, कपिल नरूला, रूपम कुशवाहा, कवि डॉ. नितिन मिश्रा आदि सैकड़ों लोग मौजूद थे।

dainiklalsa
Author: dainiklalsa

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