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July 23, 2024 5:30 pm

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मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती का 59वां स्मृति दिवस मनाया

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हाथरस-24 जून। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती जी का 59वां स्मृति दिवस आध्यात्मिक ज्ञान दिवस के रूप में ब्रह्माकुमारीज तपस्या धाम में मनाया गया।
कार्यक्रम में जिला प्रभारी राजयोगिनी सीता दीदी, वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका सह जिला प्रभारी बीके भावना बहिन, अतुल आंधीवाल एड., कवि श्याम बाबू चिंतन, दाऊजी से बीके सीमा बहिन आदि ने संगठित रूप से जगदम्बा सरस्वती के छवि चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
मंचासीन सभी अतिथियों ने मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती को अपनी वाणी व काव्य पाठ कर श्रद्धांजलि पुष्पांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर जिला प्रभारी ब्रह्माकुमारी सीता दीदी जी ने मम्मा की विशेषताओं के बारे में बताया। जब-जब संसार में दिव्यता की कमी, धर्म की ग्लानि, समाज में अन्याय, अत्याचार, चरित्र में गिरावट व विश्व में अशांति के बीज पनपने लगते हैं, तब-तब इन समस्त बुराइयों को समाप्त करने के लिए किसी महान विभूति का जन्म होता है। इन्हीं में से एक महान विभूति थीं-जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) इसका बचपन का नाम राधे था। इनका जन्म 1919 में अमृतसर में हुआ। मम्मा सर्व गुणों की खान और मानवीय मूल्यों की विशेषताओं से सम्पन्न थीं। मम्मा ने कभी किसी को मौखिक शिक्षा नहीं दी बल्कि अपने प्रैक्टीकल जीवन से प्रेरणा दी। इसी से दूसरे के जीवन में परिवर्तन आ जाता था। मम्मा के सामने चाहे कितना भी विरोधी, क्रोधी, विकारी, नशेड़ी आ जाता परन्तु मम्मा की पवित्रता, सौम्यता व ममतामयी दृष्टि पाते ही वह शांत हो जाता और मम्मा के कदमों में गिर जाता।
वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बीके भावना बहन ने कहा मम्मा की सत्यता, दिव्यता व पवित्रता की शक्ति ने लाखों कन्याओं के लौकिक जीवन को अलौकिकता में परिवर्तित कर दिया और उन कन्याओं ने अपना सीमित परिवार त्याग कर विश्व को अपना परिवार स्वीकार करके विश्व की सेवा में त्याग व तपस्या द्वारा जुट गईं।
मानव समाज को मम्मा ने अपने जीवन के अनुभव से एक बहुत बड़ी देन दी है कि अपने जीवन को सफल बनाने के लिए व विश्व सेवा के लिए बीस नाखूनों की शक्ति लगा दो तो सफलता अवश्य आपके हाथ लगेगी। मम्मा बहुत कम बोलती थीं और दूसरों को भी कम बोलने का इशारा करती थीं। अधिक बोलने से हमारी शक्ति नष्ट हो जाती है, ऐसा मम्मा का कहना था।इस प्रकार अपने ज्ञान, योग, पवित्रता के बल से विश्व की सेवा करते हुए मम्मा-सरस्वती ने 24 जून 1965 को अंतिम सांस ली।
इस अवसर पर माउंट आबू से कर्मवीर भाई, सासनी से बीके शोभा बहिन, किरण कपूर, मुरसान से बबिता बहिन, शिक्षिका संगीता अग्रवाल, बीके रेनू बहिन, देव विधा मंदिर पब्लिक स्कूल की डायरेक्टर राधा अग्रवाल, बीके रश्मि बहिन, बीके राधा बहिन आदि सभी भाई बहनों ने मम्मा को पुष्प अर्पित करके भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।

dainiklalsa
Author: dainiklalsa

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