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June 21, 2024 9:13 am

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साधु संगति से दुष्ट अजामिल को मिला मोक्ष

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सासनी-16 मार्च। आगरा अलीगढ राजमार्ग स्थित श्री राधे-राधे गार्डन में में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ में विश्व विख्यात भागवताचार्य अतुल कृष्ण शास्त्री महाराज ने संगीत स्वरलहरियों के मध्य अपनी मधुरवाणी से जडभरत, डाकू अजामिल, प्रह्लाद चरित्र तथा वामन अवतार की कथा का बडा ही अद्भुत वर्णन किया। श्रीमद् भागवत कथा में श्रोताओं की भारी भीड़ उमड़ी। किसी-किसी प्रसंग पर तो श्रोताओं के नेत्रों से अश्रुधारा बह उठी।
शनिवार को कथा में आचार्य ने उन्होंने बताया कि, जीवन को सफल बनाने के लिए कथा श्रवण करने से जन्मों का पाप कट जाता है। उन्होनें भक्त प्रह्लाद चरित्र की कथा के बारे में भक्तों को विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि भक्ति में दिखावा नहीं होना चाहिए। उन्होंने जड़ भरत का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि, जड़भरत का प्रकृत नाम भरत है, जो पूर्वजन्म में स्वायंभुव वंशी ऋषभदेव के पुत्र थे। मृग के छौने में तन्मय हो जाने के कारण इनका ज्ञान अवरुद्ध हो गया था जिससे ये जड़भरत कहलाए। डाकू अजामिल की कथा में आचार्य ने बताया कि अजामिल कान्यकुब्ज ब्राह्माण कुल में जन्मे थे और कर्मकाण्डी थे। एक दिन उन्होंने एक नर्तकी को देख लिया। नर्तकी वेश्या थी बावजूद इसके वह उसे अपने घर ले आए। एक दिन संतों की टोली आई और अजामिल के घर के सामने डेरा जमा दिया। अगले दिन साधुओं ने अजामिल से दक्षिणा मांगी। इस पर वह बौखला गया और साधुओं को मारने के लिए दौड़ पड़ा। तभी पत्नी ने उसे रोक दिया। साधुओं ने कहा कि हमें रुपया पैसा नहीं चाहिए। वह अपने होने वाले पुत्र का नाम तुम नारायण रख ले बस यही हमारी दक्षिणा है। अजामिल की पत्नी को पुत्र पैदा हुआ तो अजामिल ने उसका नाम नारायण रख लिया और नारायण से प्रेम करने लगा। इसके बाद जब अजामिल का अंत समय आया तो यमदूतों को भगवान के दूतों के सामने अजामिल को छोड़ कर जाना पड़ गया। इस तरह अजामिल को मोक्ष की प्राप्ति हुई। इसलिए कहा गया है कि भगवान का नाम लेने से ही मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। वहीं उन्होंने वामन अवतार की कथा का वर्णन करते हुए बताया कि वामन भगवान के कहने पर राजा बलि ने तीन पग भूमि दान देने का वायदा किया तो वह पूरा ही भगवान में समाजित हो गया। और राजा बलि को मोक्ष मिला। उन्होंने कथा का भावार्थ बताते हुए कहा कि श्रीमद्भावत कथा ही मानव को कष्टों से मुक्ति दिला सकती है। इस दौरान इस दौरान यज्ञाचार्य राजकृष्ण महाराज तथा राजा परीक्षित बने कृष्णकांत (कन्नू) वाष्र्णेय एवं उनकी पत्नी करिश्मा के साथ कल्यान दास, प्रमोद कुमार, भगवान दास वाष्र्णेय, शैलेश वाष्र्णेय, शैलेश वाष्र्णेय, सचिन वाष्र्णेय, ललित वाष्र्णेय, सचिन ललित, उषा वाष्र्णेय, सुनीता, वंशिका, कोमल, हिमांशु, प्रिंस, कृष्णा तिवारी, राजुल मौजूद थे। प्रमोद कुमार वाष्र्णेय, भगवानदास वाष्र्णेय, एवं समस्त वाष्र्णेय परिवार तथा श्रोता भक्त मौजूद थे।

dainiklalsa
Author: dainiklalsa

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