Explore

Search
Close this search box.

Search

June 21, 2024 10:31 am

Our Social Media:

लेटेस्ट न्यूज़

श्रीमद्भागवत विश्राम के बाद हुआ विशाल भंडारा प्रसाद वितरण

WhatsApp
Facebook
Twitter
Email

आगरा अलीगढ राजमार्ग स्थित श्री राधे-राधे गार्डन में विश्व विख्यात भागवताचार्य अतुल कृष्ण शास्त्री महाराज की संगीत स्वरलहरियों के मध्य मधुरवाणी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ का समापन के हवन यज्ञ और भंडारे के साथ किया गया। भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहले हवन यज्ञ में आहुति डाली और फिर प्रसाद ग्रहण कर पुण्य कमाया।
भागवत कथा का आयोजन कल्याणदास वाष्र्णेय परिवार की ओर से कराया गया था। कथा आगरा अलीगढ राजमार्ग स्थित श्री राधे-राधे गार्डन में संगीत स्वरलहरियों के मध्य मधुरवाणी में विश्व विख्यात भागवताचार्य अतुल कृष्ण शास्त्री महाराज ने सात दिन तक चली कथा में भक्तों को श्रीमद्भागवत कथा की महिमा बताई। उन्होंने लोगों से भक्ति मार्ग से जुड़ने और सत्कर्म करने को कहा। आचार्य ने कहा कि हवन-यज्ञ से वातावरण एवं वायुमंडल शुद्ध होने के साथ-साथ व्यक्ति को आत्मिक बल मिलता है। व्यक्ति में धार्मिक आस्था जागृत होती है। दुर्गुणों की बजाय सद्गुणों के द्वार खुलते हैं। यज्ञ से देवता प्रसन्न होकर मनवांछित फल प्रदान करते हैं। उन्होंने बताया कि भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति भव सागर से पार हो जाता है। श्रीमद भागवत से जीव में भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य के भाव उत्पन्न होते हैं। इसके श्रवण मात्र से व्यक्ति के पाप पुण्य में बदल जाते हैं। विचारों में बदलाव होने पर व्यक्ति के आचरण में भी स्वयं बदलाव हो जाता है। कथावाचक ने भंडारे के प्रसाद का भी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि प्रसाद तीन अक्षर से मिलकर बना है। पहला प्र का अर्थ प्रभु, दूसरा सा का अर्थ साक्षात व तीसरा द का अर्थ होता है दर्शन, जिसे हम सब प्रसाद कहते हैं। हर कथा या अनुष्ठान का तत्वसार होता है जो मन बुद्धि व चित को निर्मल कर देता है। मनुष्य शरीर भी भगवान का दिया हुआ सर्वश्रेष्ठ प्रसाद है। जीवन में प्रसाद का अपमान करने से भगवान का ही अपमान होता है। भगवान का लगाए गए भोग का बचा हुआ शेष भाग मनुष्यों के लिए प्रसाद बन जाता है। कथा समापन के दिन विधिविधान से पूजा कराते हुए हवन और भंडारा कराया गया। इसमें यजमान कल्याणदास वाष्र्णेय ने अपने परिवार के साथ आहुति देकर शांति शौहार्द की कामना की। पूजन के बाद दोपहर को भंडारा लगाकर प्रसाद बांटा गया। इस इस दौरान यज्ञाचार्य राजकृष्ण महाराज तथा राजा परीक्षित बने कृष्णकांत (कन्नू) वाष्र्णेय एवं उनकी पत्नी करिश्मा के साथ कल्यान दास, प्रमोद कुमार, भगवान दास वाष्र्णेय, राजुल मौजूद थे। प्रमोद कुमार वाष्र्णेय, भगवानदास वाष्र्णेय, शैलेश वाष्र्णेय, शैलेश वाष्र्णेय, सचिन ललित, उषा वाष्र्णेय, सुनीता, वंशिका, कोमल, हिमांशु, प्रिंस, कृष्णा तिवारी, सचिन वाष्र्णेय, ललित वाष्र्णेय, एवं समस्त वाष्र्णेय, परिवार तथा श्रोता भक्त मौजूद थे।

sunil sharma
Author: sunil sharma

Leave a Comment

Advertisement
लाइव क्रिकेट स्कोर