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July 22, 2024 10:24 am

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निःस्वार्थता हमें वसुधैव कुटुम्बकम महसूस करने में मदद करती है-अनंतानंद महाराज

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हम जो भी कार्य करते हैं उनमें से अधिकांश केवल हमारे अपने लाभ के लिए ही किए जाते हैं। हम शायद ही कभी इस बात की चिंता करते हैं कि हमारे कार्य दूसरों को कैसे प्रभावित कर सकते हैं। यह मानसिकता हमें स्वार्थी तरीके से कार्य करने के लिए मजबूर करती है और हमें अपने आसपास के लोगों से अलग करती है। दूसरी ओर, निस्वार्थता हमें यह महसूस करने में मदद करती है कि दुनिया एक परिवार है (वसुधैव कुटुम्बकम)। हमारे कार्य ऐसे होने चाहिए कि वे दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने में मदद करें और हमारे आस-पास के लोगों के साथ बंधन में मदद करें।
शनिवार को ह बातें गांव रूदायन में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दौरान परम पूज्य श्री मलूक पीठाधीश्वर श्री राजेन्द्र दास जी के कृपा पात्र श्री आनन्द दास ( पुजारी ) जी महाराज जी के मुखार विंद से कथा मे बताई गईं। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि जो न तो हर्षित होता है, न शोकित, जो न शोक करता है, न कामना करता है, तथा जो शुभ-अशुभ दोनों ही वस्तुओं का त्याग करता है ऐसा भक्त मुझे बहुत प्रिय है। जो मित्र और शत्रु में सम है, जो मान-अपमान, सर्दी-गर्मी, सुख-दुख, यश-अपयश में समभाव रखता है, जो दूषित संगति से सदैव मुक्त रहता है, सदैव मौन और किसी भी बात से संतुष्ट रहता है, जो किसी निवास की परवाह नहीं करता, जो ज्ञान में स्थिर है और जो भक्ति में लीन है ऐसा व्यक्ति मुझे बहुत प्रिय है। कथा का भावार्थ बताते हुए कथा व्यास ने कहा कि जो व्यक्ति श्रीमद्भावगत कथा सुनता है अथवा पढता है वह संसार की मोहमाया से परे मोक्ष का अधिकारी हो जाता है। इस दौरान राजा परीक्षित के रूप मे रिसेंन्द्र शर्मा तथा रानी रूप मे श्रीमती मनु देवी, श्री रामचैक मंदिर महंत श्री केशव दास जी, रुपेश उपाध्याय, खगेन्द्र शास्त्री, शुभम उपाध्याय, अरविन्द, नमन मिश्रा, नमन उपाध्या, मोहन, मनोज पण्डित, सहित तमाम ग्रामीण भक्त मौजूद थे।

sunil sharma
Author: sunil sharma

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