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June 21, 2024 7:21 am

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इस बार 25 मार्च को खेलेंगे होली – खगेंद्र शास्त्री

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इस वर्ष पूर्णिमा रविवार को सुबह नौ बजकर चाैवन मिनट से प्रारंभ हो रही है, जो पच्चीस मार्च को दोपहर बारह बजकर उन्नतीस मिनट पर समाप्त हो रही है। ऐसे में होलिका दहन चैबीस मार्च और रंगों वाली होली पच्चीस मार्च को खेली जाएगी।
सोमवार को यह जानाकारी देते हुए ओम शिव शक्ति आराधना ज्योतिष केंद्र के ज्योतिषाचार्य पंडित खगेंद्र शास्त्री ने बताया कि इस वर्ष होलिका दहन चैबीस मार्च को है। इसके साथ ही इस दिन देर रात होलिका दहन किया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, रात्रि ग्यारह बजकर पैंतीस मिनट से रात्रि बारह बजकर उन्न्चास मिनट पर दहन समाप्त होगा। ऐसे में होलिका दहन के लिए आपको कुल एक घंटे चैधह मिनट का समय मिलेगा। वर्ष 2024 में होली पर पाताल वासिनी भद्रा होने से शुभ एवम मंगलकारी है। हर बार होलिका का पूजन एक या दो साल के अंतराल में भद्रा के साक्षी में आता ही है। यह भी लगभग स्पष्ट है कि होलिका के पूजन पर भद्रा का दोष कितना मान्य होता है या नहीं होता है। इस विषय पर यदि चर्चा की जाए तो वैदिक हिन्दू ज्योतिष शास्त्र में भद्रा का वास चंद्रमा के राशि संचरण के आधार पर बताया गया है। यदि भद्रा कन्या, तुला, धनु राशि के चंद्रमा की साक्षी में आती है तो वह भद्रा पाताल में वास करती है और पाताल में वास करने वाली भद्रा धन-धान्य और प्रगति को देने वाली मानी गई है। इस दृष्टि से इस भद्रा की उपस्थिति शुभ मंगल कारी मानी गई है। धन-धान्य की वृद्धि देने वाला पर्व कुल मिलाकर नक्षत्र मेखला की गणना के अनुसार देखें तो होलिका का पूजन प्रदोष काल में होगा। इस समय उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र रहेगा। यह नक्षत्र कन्या राशि की कक्षा में आता है। मुहूर्त चिंतामणि की गणना के अनुसार उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में किया गया कार्य विशेष पर्व काल पर आता हो तो यह नक्षत्र धन-धान्य की वृद्धि देने वाला माना गया है। वहीं फाल्गुन मास अष्ट्मी सत्रह मार्च 2024 रविवार होलाष्टक फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से शुरू होता है। और फाल्गुन शुक्ल पक्ष अमला एकादशी (रंगभरनी एकादशी) बीस मार्च बुधबार को है। चैबीस मार्च को होलिका दहन होगा, होलिका दहन के बाद होलाष्टक समाप्त हो जाएंगे, रंगवाली होली 25 मार्च, 2024 सोमवार को खेली जाएगी है। कुल मिलाकर होलाष्टक, हिंदू माह फाल्गुन के शुक्ल पक्ष अष्टमी की तिथि से आठ दिनों की अवधि को अशुभ माना जाता है। इस अवधि को किसी भी शुभ कार्य के लिए वर्जित माना जाता है, जैसे कि विवाह, गृहप्रवेश, मांगलिक कार्य आदि निषेध है आठवें दिन फाल्गुन पूर्णिमा के प्रदोष काल में होलिका दहन के साथ होलाष्टक समाप्त होता है।

sunil sharma
Author: sunil sharma

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