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July 22, 2024 10:15 am

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बच्चों की मौत के आरोपी को आजीवन कारावास की सजा

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हाथरस-1 मार्च। पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के दृष्टिगत पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में पैरवी हेतु चिन्हित अभियोग में मॉनिटरिंग सेल तथा अभियोजन की प्रभावी पैरवी के परिणाम स्वरुप न्यायालय द्वारा थाना हाथरस जंक्शन के हत्या व एससी/एसटी एक्ट के अभियोग से सम्बन्धित 1 अभियुक्त को आजीवन कारावास व 30 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
उल्लेखनीय है कि थाना हाथरस जंक्शन पर वर्ष 2018 में 2 जुलाई को संजू पुत्र मोतीलाल निवासी गांव कटरा दरियापुर अपनी पत्नी बबली और दो बच्चे 7 वर्षीय हर्ष और 4 वर्षीय नकुल के साथ अपनी दादी को देखने गांव आया था। वहां संजू का अपने पड़ोसी अंशु पुत्र भंवरपाल से किसी बात को लेकर गाली गलौज हो गई और उसके अगले दिन अंशु ने संजू के दोनों बेटों को अपने पास बुलाया और प्यार से खाने के लिए टॉफी जैसी कोई वस्तु दी और उक्त वस्तु को खाकर नकुल और हर्ष की तबीयत बिगड़ गई। इन दोनों बच्चों को परिवार के लोग उपचार के लिए डॉक्टर के यहॉ ले गए तो नकुल को मृत घोषित कर दिया गया और हर्ष का उपचार हुआ। उक्त मामले में संजू ने अंशु के विरुद्ध मुकद्दमा दर्ज कराया था। थाना हाथरस जंक्शन पर धारा 328/504/302/307 भादवि व 3(2)(5) एससी/एसटी एक्ट बनाम अंशू पुत्र स्व.भंवरपाल सिंह निवासी ग्राम कटरा दरियापुर थाना हाथरस जंक्शन के विरुद्ध पंजीकृत कराया था। अभियोग की विवेचना तत्परता से गुणवत्ता कायम रखते हुए पूर्ण की गयी तथा आरोपियों के विरूद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया। हत्या जैसे संगीन अपराधों पर कठोरता से नियंत्रण लगाने एवं अभियुक्तों को अधिकाधिक दंडित कराने हेतु शासन के दिशा निर्देशो के क्रम में तथा पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के दृष्टिगत पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में पैरवी हेतु चिन्हित अभियोगों को प्राथमिकता के आधार पर अपने निकट पर्यवेक्षण में मॉनीटरिंग सेल के माध्यम से अभियोग का न्यायालय में विचारण के दौरान सम्यक पैरवी एवं प्रभावी कार्यवाही की गई तथा अभियोजन शाखा द्वारा भी प्रभावी पैरवी की गई। पैरवी के परिणाम स्वरुप आज न्यायालय विशेष न्यायाधीश, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम द्वारा अभियुक्त अंशू उपरोक्त को मुकददमा धारा 328 भादवि के अन्तर्गत 7 वर्ष के सश्रम कारावास व 5 हजार रूपये के अर्थदण्ड, धारा 307 भादवि के अन्तर्गत 7 वर्ष के सश्रम कारावास व 5 हजार रूपये के अर्थदण्ड, धारा 302 भादवि के अन्तर्गत आजीवन कारावास व 10 हजार रूपये के अर्थदण्ड तथा धारा 3(2)(5) एससीध्एसटी एक्ट के अन्तर्गत आजीवन कारावास व 10 हजार रूपये के अर्थदण्ड की सजा सुनाई गयी है ।

dainiklalsa
Author: dainiklalsa

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